Inside this Article:
- अर्श के पूर्वरूप Bawasir kaise hota hai
- आयुर्वेद में अर्श 6 प्रकार के बताये गए है Types of piles in hindi
- वात दोष से होने वाले के कारण:-
- पित्तज दोष से होने वाले के कारण
- कफज दोष से होने वाले के कारण
- त्रिदोष के होने कारण:-
- जन्मजात अर्श :-
- वातज अर्श के लक्षण
- पित्तज अर्श के लक्षण
- कफज अर्श के लक्षण
- Piles Treatment in Hindi | बवासीर का जड़ से इलाज
- Piles cure in 3 days | Bawasir ka 3 din mei Ilaj
- महा भयंकर नुस्खा | Piles Treatment Without Surgery
Piles meaning in hindi or what is piles or bawasir kya hota hai
अर्श के पूर्वरूप Bawasir kaise hota hai
जब यह रोग होने वाला होता है तो उस से पहले कब्ज होती है, शरीर में दुर्बलता आती है, कुक्षि (पेडू) में गुड़गुड़ाहट होना, शरीर में थकान होना, अधिक डकार आना, जांघ और इसके आसपास के हिसे में शिथिलता(ढीलापन) आना, मल का काम मात्रा में निकलना, पेट के रोग होते हैं ( एसिडिटी, गैस वगेरा)
आयुर्वेद में अर्श 6 प्रकार के बताये गए है Types of piles in hindi
वात दोष के कारन से
पीत दोष के कारन से
कफ दोष के कारन से
त्रिदोष जिसमे तीनो दोष मिले हुए हों
जन्म से ही
रक्त जिसे खुनी बवासीर कहते हैं।
बवासीर के कारण | Causes of Piles in Hindi
वात दोष से होने वाले के कारण:-
अत्यंत कषाय रसयुक्त पदार्थो के सेवन से, अत्यंत कटु जैसे ( खड़े मसाले, बहार के मिर्च मसाले), तिक्त रस वाले पदार्थ जैसे (पटोल, जयंती, खस, चन्दन, नीम, करेला, छोटी और बड़ी कटेरी, अतीस और वच), अत्यंत रुखा सूखा भोजन करने से, शीतल और उपवास अधिक करने से, डाइटिंग करने की वजह से बहुत कम आहार लेने से, अधिक मधपान करने से, ठंडी जगह रहने से, बहुत अधिक व्यायाम करने से, अधिक चिंता करने से, अधिक धुप या लू लगने से, वात दोष कुपित हो जाता है जिसके कारण यह रोग होता है।
अगर ऊपर दिए हुए किसी भी चीज के अत्यधिक सेवन से आपके यह रोग होता है समझना चाहिए की वात दोष के बढ़ने की वजह से हुआ है।
पित्तज दोष से होने वाले के कारण
अत्यंत कटु, अम्ल, नमकीन, रसयुक्त और उष्ण पदार्थों के सेवन से, अधिक व्यायाम करने से, अधिक धुप या लू लगने से, गर्म जगह या गर्म वातावरण में रहने से, क्रोध अधिक करने से, शराब अधिक पीने से, ईर्ष्या करने से, ऐसे पदार्थ खाने से जिस से शरीर में जलन उत्पन हो जाती है जैसे खड़े मसाले या गरम मसाले यह सब करने या खाने से शरीर में पीत कुपित होकर यह पित्तज अर्श उत्पन कर देता है।
कफज दोष से होने वाले के कारण
अत्यंत मधुर, घी युक्त, तासीर में ठन्डे पदार्थ, नमकीन, अम्ल, देर से पचने वाले पदार्थ जैसे मांस आदि, या घी बने हुए पदार्थ, व्यायाम बिलकुल नहीं करने से, सारा दिन खाली पड़े रहने से, दिन में सोने से, दिन रात कुर्सी आदि पे बैठे रहने से, दिन भर सुखकर शया पे बैठे या लेते रहने से, पूर्व से आने वाली हवाओं के लगने से जिसे हम पुरवैया बोलते हैं, यह सेहत के लिए अच्छी नहीं होती।
ठंडी जगह में रहने से, या AC आदि या ठन्डे वातावरण में रहने से, आइसक्रीम आदि खाने से पीज़ा, बर्गर, मैदा वाली चीजें, तम्बाखू, गुटखा खाने से कफज अर्श होती है।
त्रिदोष के होने कारण:-
सभी दोषो के मिश्रण को त्रिदोष जानना चाहिए। अगर कोई दो दोष के मिश्रण होते है तो उसे द्विंदज जानना चाहिए। एक सहज अर्श भी किन्ही किन्ही ग्रंथो में दिया गया है उसे त्रिदोष की तरह समझना चाहिए।
जन्मजात अर्श :-
यह आयुर्वेद में असाध्य बताया गया है। कई बार देखा गया है की उस से कई कई बच्चों को तकलीफ नहीं होती और वो शरीर का एक हिस्से की तरह रह जाता है।
बवासीर के लक्षण | Symptoms of Piles in Hindi
वातज अर्श के लक्षण
इसमें मस्से सूखे से होते है, पीड़ा रहना, काले रंग का, या हलके लाल रंग का अकड़ा हुआ सा, बेर खजूर की गुठली जैसे या ऊपर से सुई जैसे पैने दीखते हैं। इसमें सर में, पसलियों में, कन्धा, जांघ, कमर और पेडू में अधिक पीड़ा होती है। इसके अलावा छींक आना, डकार आना, कब्ज होना, हृदय में जकड़न महसूस होना, खाना खाने का मन ना होना, खांसी और सांस सम्बन्धी बीमारी होना। कान में कुछ कुछ शब्द सुनाई देना।
जानिये कब्ज का इलाज
रोगी की त्वचा, नाख़ून, मल, मूत्र, और मुँह हलके काले रंग का हो जाता है। यह रोग अगर समय पर ठीक न हो या उग्र हो जाये तो आगे चलकर गुल्म रोग (पेट में एक तरह की गाँठ बन जाती है, stoamch cancer) का कारण बनता है, लिवर के रोग होते हैं या Fatty liver हो जाता है , पेट के रोग होते हैं और prostate enlargement की भी समस्या बन जाती है।
इसमें जो मल आता है वो गांठयुक्त, कुछ कुछ शब्द करते हुए मल निकलना, पीड़ा के साथ मल निकलना, झागदार और cough मिला हुआ मल निकलता है।
पित्तज अर्श के लक्षण
पित के बढ़ने क कारण जो मास्सा होता है वह नीले रंग का सा होता है या फिर लाल पीला या सफ़ेद रंग का होता है। उसमे से बिलकुल हल्का हल्का सा रक्त भी आता है लेकिन यह रक्त अर्श नहीं कहलाता। मल काफी दुर्गन्ध युक्त, पतला, कोमल और स्निघ्द आता है।
मस्से में जलन रहना, शरीर में बुखार आना, पसीने आना, प्यास का अधिक लगना, बेहोशी आना, कमजोरी आना, व्याकुलता होना, स्पर्श करने पर शरीर गर्म महसूस होना।
मास्सा का जो मध्य भाग होगा वह वहां से मोटा होगा। और रोगी की त्वचा, नाख़ून आदि हरे या पीले रंग के से हो जाते है।
कफज अर्श के लक्षण
कफज के कारण जो मास्सा होता है वो गहरी जड़ वाला होता है, मंद मंद पीड़ा देने वाला, सफ़ेद रंग का, गोलाकार और उठा सा होता है। उसके अंदर खुजली सी चलती रहती है। इसके कारण खांसी, सांस सम्बंधित बिमारियों का होना, बार बार मुँह से लार का गिरना, जुखाम हो जाना, मूत्र के रोग उत्पन हो जाना, सर में जकड़न सी होना, मूत्र का कम आना उस उसमे जलन होना, शीतज्वर हो जाना, नपुंसकता आजाना, पेट की अग्नि मंद पद जाना, उलटी आना या उबकाई आना, दस्त आदि लग जाना।
इसमें जो मल आता है वो चर्बी के सामान कफ से युक्त आता है। इसमें अंकुरों से न तो स्त्राव होता है और ना ही फुटते हैं। त्वचा, नाख़ून, पीले रंग के या हलके गुलाबी रंग के होते हैं और त्वचा, नाखु आदि ऑयली रहती है।
Piles Treatment in Hindi | बवासीर का जड़ से इलाज
👉🏻एक भाग काली मिर्च का चूर्ण, दो भाग सोंठ, चार भाग चित्रकमूल का चूर्ण, और आठ भाग सूरनकंद का चूर्ण सबको आपस में मिक्स करलें। एक गुड़ की बेर जितनी गोली बनाये और उसको इस चूर्ण में घुमाएं ताकि चूर्ण गुड़ के चिपक जाए। चूर्ण लगभग दो से तीन ग्राम गुड़ के लग जाए इतनी बड़ी बना लें। इसका सुबह शाम सेवन करने से यह रोग दूर होता है। इसका फल प्रसिद्ध है।
👉🏻इलाइची एक भाग, दालचीनी दो भाग, तेजपत्ता तीन भाग, नागकेशर चार भाग, काली मिर्च पांच भाग, पीपरी छह भाग, सोंठ सात भाग, सबका चूर्ण बना के मिक्स करलें। अब यह मिक्सचर जितना चूर्ण बन गया इसके जितना बराबर ही इसमें देशी खांड मिक्स कर लें। अगर सबका मिक्सचर 250 ग्राम बनता है तो देशी खांड भी 250 ग्राम मिलेगी।
इसको सुबह शाम खाली पेट पानी के साथ सेवन करने से बवासीर, कब्ज, गुल्म रोग(पेट में गाँठ), पेट के सभी रोग, शरीर में सूजन, खून की कमी और गुदा के सभी रोग इस से ठीक होते है।
👉🏻सोंठ का चूर्ण या फिर पीपरी का चूर्ण या फिर हरड़ का चूर्ण या फिर अनार के दानो का चूर्ण इनमे से किसी भी एक चूर्ण की आधी चमच गुड़ के साथ सेवन करने से अर्श रोग, आमदोष, अजीर्ण और कब्ज ठीक होती है।
👉🏻देशी खांड को सूरनकंद का चूर्ण पानी के साथ खाने से या फिर नागकेशर के चूर्ण पानी के साथ खाने से यह रोग नष्ट होता है।
👉🏻 शहद मिला हुआ माखन खाने से भी यह रोग नष्ट होता है। shahad ke fayde asli shahad ki pahchan kaise karein
Piles cure in 3 days | Bawasir ka 3 din mei Ilaj
इसके सेवन से खांसी, सांस सम्बन्धी बीमारी , food poisoning , अग्निमांध(पेट की अग्नि कम होना), बवासीर , लिवर के रोग, मूत्र के रोग सभी ठीक होते है।
इस में एक भाग को अगर 20 ग्राम मान लिया जाये तो पीपरा मूल दो भाग बताया गया है याने की 40 ग्राम हो जाता है। जिनको चूर्ण कम मात्रा में या अधिक मात्रा में बनाना हो वह बना सकते हैं इसीलिए मैंने भागों में मात्रा लिखी है ताकि कोई उलझन न रहे।
अगर बवासीर नई है तो तीन दिन में ही ठीक हो जाती है लेकिन पथ्य और अपथ्य का ध्यान रखना पड़ता है।
👉🏻इमली के बीजों का छीलका उतार कर कूट लें। और पानी के साथ घोंट कर चने जितनी गोलियां बना लें।
इस गोली का दिन में तीन बार सेवन करें। गोली लेने से पहले या लेने के बाद एक घण्टे कुछ न खाएं। सीधा मुँह में डाल के चबा चबा के खाएं। मात्र तीन दिन में खूनी बवासीर में लाभ होता है।
-यह नुस्खा बृहद निघंटु के ग्रंथ में दिया गया है।
महा भयंकर नुस्खा | Piles Treatment Without Surgery
👉🏻सोनपाठा की छाल, चित्रकमूल की छाल, इन्द्रजौ, करंज, सेंधा नमक और सोंठ इन सभी को बराबर मात्रा में लेके चूर्ण बना के मिक्स करलें।
इस चूर्ण को दो बार छाछ के साथ सेवन करने से एक सप्ताह में चाहे की कितने ही मस्से क्यों न हो सब नष्ट हो जायेंगे और इस रोग से बहार निकल जायेंगे। सुबह खली पेट सेवन करें और एक बार शाम होने से पहले करें।
👉🏻आम के पत्तों का रस, आंवले के पत्तो का रस, जामुन के पत्तों का रस प्रत्येक 30-30 ग्राम लें। इसमें सुवाद अनुसार देशी मिश्री मिला लें।
सुबह शाम खाली इसको पी लें फिर इसके ऊपर से एक गिलास गाय का दूध भी पी लें। मात्र 7 दिन में खूनी बादी दोनो तरह की बवासीर नष्ट होती है।
रक्तार्श | Khooni Bawasir
इसके अंदर भी वात पीत कफ दोष मिले हुए हैं तो उसी से इसका भी हम प्रशिक्षण कर सकते हैं की किस दोष के बढ़ने के कारन हुआ है। मल के घृषण से पीड़ित होकर मस्से, अत्यंत दूषित होकर उष्ण होकर अधिक रक्त बहाने लगते हैं।
अधिक रक्त निकल जाने के कारण मनुष्य का शरीर पीत वर्ण का हो जाता है। रक्त की कमी के कारण अन्य रोग भी उत्पन हो जाते हैं। उसका बल, उत्साह, पराक्रम नष्ट हो जाता है। शारीरिक कमजोरी आ जाती है।
पेट में गैस रहती है, मल काला रंग का आता है और सूखा होता है। मल का रंग देख के भी पता लगा सकते हैं किस दोष की अधिकता है जैसे के पहले बता चुके हैं। दोषों के कारण और लक्षण वही रहेंगे।
खुनी बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज
👉🏻अपामार्ग जिसे हम चिरचिटा बोलते हैं इसके बीज का थोड़े से पानी के साथ घोंट के पेस्ट बना लें, फिर इसको चावल के पानी के साथ पीने से रक्तार्श का नाश होता है इसमें कुछ भी संदेह नहीं है। यह नुस्खा योगरत्नाकरः में है और बृहद निघण्टु में भी है।
👉🏻लालचन्दन, चिरैता, जबासा और सोंठ सबको बराबर मात्रा में लेके काढ़ा पीने से
या फिर
👉🏻दारूहल्दी, दालचीनी, खस, नीम की छाल इन सबको बराबर मात्रा में लेके काढ़ा बना के पीने से खुनी बवासीर का नाश करता है।
काढ़ा खाली पेट सेवन किया जाता है। दो गिलास में एक डेड चमच चूर्ण मिला इतना उबालें की आधा गिलास बच जाये फिर इसको उतार कर छान कर सेवन करें।
👉🏻कमल केशर, नागकेशर, ताज़ा मखन और देशी खांड आपस मे मिला के गोलियां बना लें। इस गोली का सेवन करें तो खूनी बवासीर नष्ट होवे।
👉🏻चित्रकमूल के चूर्ण को गाय के दूध में उबालकर उसकी दही जमा कर, फिर उसकी छाछ बना कर पीने से इस रोग में बड़ा फायदे होता है। इस से दोनों तरह की बबासीर ठीक होती हैं।
👉🏻एक तक्र(छाछ) प्रयोग होता है इस रोग में। वो तब होता है जब यह बीमारी बहुत बढ़ गयी हो, और उसकी कब्ज नहीं टूट रही हो, मल सूखा निकलता हो और बहुत ज्यादा दर्द होता हो।
तो किसी वैध की देख रेख में यह आप कर सकते हैं।
रोगी का बल, काल, और रोग विकार जान कर रोगी को प्रतिदिन केवल लस्सी ही पीनी चाहिए। अन्न नहीं खाना चाहिए। यह प्रयोग सात दिन या 15 दिन या एक महीना भी कर सकते है।
छाछ बाजारू पैकेट वाली नहीं होनी चाहिए।
👉🏻खाना कहते समय छाछ का सेवन जरूर करना चाहिए। उस छाछ में या तो भुनी हुई अजवाइन और सोंठ मिला के पियें इस से कब्ज मीट जाएगी ।
👉🏻या फिर हरड़ का चूर्ण मिलाएं या फिर त्रिफला चूर्ण मिलाएं।
👉🏻या फिर चित्रकमूल, हाऊबेर और हींग के साथ सेवन करें।
👉🏻या फिर पंचकोल के चूर्ण के साथ सेवन करें।
छाछ के सेवन से ठीक हुए मस्से शायद ही किसी के दोबारा होते है। छाछ इस रोग की परम औषध है रामबाण है। इस से दोनों तरह की बबासीर ठीक होती हैं।
अर्श पर लेप | Piles ayurvedic cream Treament
👉🏻मदार का दूध, सेहुंड का दूध, कटुतुम्बी के पत्ते, कटुकरंज इन सबको बराबर मात्रा में लेके बकरे के मूत्र के साथ पीसकर मस्सों पे लेप करने से नष्ट होते हैं।
👉🏻सेंधा नमक, बाझककोड़े का बीज, इनको कांजी के साथ पीस कर लेप करने से मस्से नष्ट होते हैं।
👉🏻पीपरी, सीरस का बीज, मदार का दूध का पेस्ट बना के लेप करने से लाभ होता है।
👉🏻पीपरी, सीरस का बीज, मदार का दूध, सेहुंड का डंडा, सेंधा नमक इन सबको पीस कर लेप करें।
👉🏻हल्दी, घुंघुची, गोमूत्र और पीपरी इन सब का पेस्ट बना के लेप करें।
👉🏻मालकांगनी के बीज का पेस्ट खुनी बवासीर के लिए अत्यंत हितकर है। यह योग लगभग सभी ग्रंथो में है।
👉🏻कड़वी तोरी के चूर्ण का लेप करने से भी बड़ा फायदा होता है।
👉🏻हल्दी, कड़वी तोरी, सेंधा नमक इनका चूर्ण, सेहुंड का दूध और गौ मूत्र मिला के पेस्ट बनाये इसके लेप से सारे मस्से नष्ट होते है। चाहे वो गुदा के हों या फिर शरीर पर होते हैं छोटे छोटे वो भी।
👉🏻सरसों का तेल या नीम का तेल या जात्यादि तेल मस्सों पे दिन में 3 से 4 बार लगाएं। इस से दोनों तरह की बबासीर के मस्से ठीक होते हैं।
👉🏻सोंठ और देवदारु के पत्तों को एक साथ पीसकर लेप करें तो बादी बवासीर नष्ट होती है।
धुप विधि चिकित्सा
Bawasir ke masse ka ilaj
👉🏻राल का चूर्ण सरसों के तेल में मिला कर युक्तिपूवर्क मस्सों पे धुवां(धुप) देवें। खुनी बवासीर के लिए अत्यंत हितकर है।
👉🏻गेहूं का आटा एक पल की मात्रा में, हींग दो माशा की मात्रा में, चार दाने भिलावे के इनकी धुप देने से गुदा का दर्द नष्ट होता है और अंकुर भी नष्ट होते है।
dekhen Ayurvedik Ancient measurements
👉🏻कपूर की धूनी गुदा में देने से खूनी बवासीर नष्ट होती है।
👉🏻अश्वगंधा, निर्गुन्डी, कटेरी और पीपरी इन सबको बराबर मात्रा में लेके चूर्ण बना के धुनि देने बादी बवासीर ठीक होव।
नीचे मोमबत्ती लगा लें और छलनी उसके ऊपर रख दे। यह कुछ ऐसे यत्न से करें कि किन्ही दो चीजो के बीच छलनी अटक जाए और निचे मोमबत्ती आजाये। ताकि उसकी जो धुनि होगी वह मस्सों पर आराम से सीधी जाके लगे।
👉🏻मल त्याग के पश्चयात आक(मदार,ऑक्टा) के पत्तों से गुदा को पूछे तो बवासीर नष्ट होवे। आक का पौधा पूरे भारत में सड़कों किनारे या खुली जगहों में लगे रहते हैं।
Bawasir me kya khaye
कुल्थी, जौ, गेहूं, लाल रंग के शालिधान्य के चावल, पुनर्नवा, सूरनकंद, मठ्ठा(छाछ), आंवला, कैथ का फल, मखन, बथुआ, काली मिर्च, बैंगन, बकरी या गाय का दूध, हरड़ आदि।
अनाज: अनाजों में गेहूं जो के मोटा पीसा होना चाहिए, जौ, शालीधान के चावल।
दालः दालों में मसूर की दाल, मूंग की दाल, अरहर की दाल।
फल एवं सब्जियां: सहजन (शिग्र), टिण्डा, जायफल, परवल, लहसुन, लौकी, तोरई, करेला, कददू, मौसमी सब्जियां, चौलाई, बथुआ, अमरूद, आँवला, पपीता, मूली के पत्ते, मेथी, साग, सूरन, फाइबर युक्त फल- खीरा, गाजर, सेम, बीन्स।
अन्यः हल्का खाना खाएं, काला नमक, छाछ, ज्यादा पानी पीए(अगर कब्ज नहीं है तो ही), जीरा, हल्दी, सौंफ, पुदीना, शहद, गेहूं का ज्वारा, पुनर्नवा, नींबू, हरड़, पंचकोल, हींग।
Bawasir me kya nahi khana chahiye
मल मूत्र के वेग को धारण ना करें, देर से चने वाली चीजें ना खाएं, तम्बाखू, शराब, मैदे की चीजें ना खाएं, रात का खाना हल्का खाएं और जल्दी खाएं, सम्भोग ना करें, साइकिल और मोटर साइकिल की सवारी न करें, उत्कट आसान में ना बैठे(chair पे न बैठें), जिन जिन कारणों से यह रोग होता है वह सब ना करें।
अनाज: अनाज में नया धान, मैदा ना खाएं। पतला गेहूं का आटे की बानी रोटियां ना खाएं।
दाल: दालों में उड़द दाल, काबुली चना, मटर, सोयाबीन, छोले आदि ना खाएं।
फल एवं सबजियां: आलू, शिमला, मिर्च, कटहल, बैंगन, अरबी (गुइया), भिंडी, जामुन, आड़ू ,कच्चा आम, केला, सभी तरह की मिर्च।
अन्यः तेल, गुड़, गुड़ से बानी चीजें, समोसा, पकोड़ी, पराठा, चाट, पापड़, नया अनाज, अम्ल, कटू रस प्रधान वाले पदार्थ, सूखी सब्जियाँ, मालपुआ, ठण्डा खाना नहीं खाना चाहिए।
सख्त मना: तैलीय, खड़े मसालेदार भोजन, मांसाहार, तैल, घी, बेकरी उत्पाद, जंक फूड, डिब्बाबंद भोजन।